https://tagassistant.google.com/#/?url=https%3A%2F%2Fguldastakafi.blogspot.com%2F بی. ایف. اسکینر اور ایرک ایرکسن کا اصول ( बी. एफ. स्किनर और इरिक ऐरिक्सन का सिद्धांत)

بی. ایف. اسکینر اور ایرک ایرکسن کا اصول ( बी. एफ. स्किनर और इरिक ऐरिक्सन का सिद्धांत)

بی. ایف.  اسکینر کا نظریہ: تقویت دینے کا اصول बी. एफ. स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत B. F. Skinner: Operant Conditioning Theory "Erik Erikson"(guldastakafi.blogspot.com)

بی. ایف.  اسکینر کا نظریہ: تقویت دینے کا اصول

बी. एफ. स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत

B. F. Skinner: Operant Conditioning Theory

یہ نظریہ ہارورڈ یونیورسٹی، امریکہ کے پروفیسر بی ایف اسکینر نے پیش کیا تھا۔

इस सिद्धांत का प्रतिपादन अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.एफ. स्किनर दद्वारा किया गया।
This theory was proposed by Professor BF Skinner of Harvard University, USA.

بی ایف  اسکینر نے جواب پر سب سے زیادہ زور دیا، اس لیے اسے آپریٹ کنڈیشن (اثر قبول کرنے کی حالت) کا اصول کہاجاتا ہے۔

बी.एफ. स्किनर ने सबसे अधिक अनुक्रिया (Response) पर जोर दिया، इसलिए इसे क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत कहा जाता है।

 بی ایف اسکینر نے اپنے تجربات پہلے چوہوں اور پھر کبوتروں پر کئے۔

انہوں نے ایک ڈبہ لیا اور اس میں ایک چوہا بند کر دیا۔ باکس کے ساتھ ایک بٹن جڑا ہوا تھا، اس میں ایک سوراخ تھا، جب بٹن دبایا جاتا تو اس سوراخ سے کھانا آتا تھا، جب چوہے کو بھوک لگی تو وہ ادھر اُدھر چلنے لگا، اچانک اس کا پیر بٹن پرلگا اور اس کے لیے سوراخ سے کھانا آگیا، اس کے بعد اس نے محسوس کیا اور اس سوراخ سے ہی اس کے لیے کھانا آتا ہے، لہذا اس نے یہ عمل دہرایا اور کھانا پھر آگیا، اب جب بھی چوہا اس عمل کو کرتا اس کے لیے کھانا آجاتا یعنی اسے کھانا مل جاتا تھا، اسی عمل کو آپریٹ کنڈیشن کا اصول کہا جاتا ہے۔
बीएफ स्किनर ने अपना प्रयोग पहले चूहे पर उसके बाद कबूतर पर किया:
BF Skinner conducted his experiments first on rats and then on pigeons.
उन्होंने एक बक्सा लिया और उसमें एक चूहा बंद कर दिया। डिब्बे में एक बटन लगा हुआ था, उसमें एक छेद था, बटन दबाने पर इस छेद से खाना निकलता था, जब चूहे को भूख लगी तो वह इधर-उधर घूमने लगा, अचानक उसका पैर बटन पर लगा और उस छेद से भोजन आगया, फिर उसने महसूस किया कि भोजन इसी छेद के माध्यम से भोजन उसके लिए आता है, इसलिए उसने इस प्रक्रिया को दोहराया और भोजन फिर से आया, अब जब भी चूहा यह प्रक्रिया करता तो भोजन उसके लिए आजाता यानी उसे खाना मिल जाता, इस प्रक्रिया को संचालक स्थिति का सिद्धांत कहा जाता है।

اس تجربے سے جو نتیجہ اخذ کیا گیا ہے وہ یہ ہے کہ پہلے ردعمل آتا ہے، بعد میں محرک آتا ہے اور جیسے جیسے کمک (مدد، حمایت) آتی ہے، ویسے ویسے درست جواب دینے اور ہدف تک پہنچنے کے عمل کی شدت میں اضافہ ہوتا ہے اورسیکھنے کے ردعمل میں بھی۔

इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकलता है कि पहले अनुक्रिया (Response) होती है बाद में उ‌द्दीपन (Stimulus) मिलता है जैसे जैसे पुनर्बलन (Reinforcement) मिलता है، वैसे वैसे सही अनुक्रिया करने और लक्ष्य तक पहुंचने की प्रक्रिया में तीव्रता आती है सीखने की अनुक्रिया में पुनर्बलन (Reinforcement) का विशेष महत्व होता है

 کمک (حمایت):- ایک محرک ہے، جو جواب دینے کے امکانات کو بڑھاتا ہے (یعنی کام کرنے کی ہمت اور جذبہ کو اجاگر کرتا ہے) اسے کمک کہا جاتا ہے، جیسے پیپر پاس کرنے پر والدین کی طرف سے سائیکل یا موبائل دینا۔

पुनर्बलन (Reinforcement):- जिस उ‌द्दीपक को देने से अनुक्रिया करने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं पुनर्बलन कहलाता है, जैसे पेपर पास करने पर parents द्वारा cycle या mobile देना।

 کمک کی دو قسمیں ہیں:

पुनर्बलन दो प्रकार के होता हैं:
There are two types of reinforcement:

نمبر ایک: مثبت کمک: جیسے کھانا، پانی، نوکری، تعریف وغیرہ۔

1. सकारात्मक पुनर्बलन (positive reinforcement): जैसे भोजन, पानी, नौकरी, प्रशंसा आदि।

نمبر دو: منفی کمک:- جیسے سزا دینا، ڈانٹنا، دھمکی دینا وغیرہ۔

2. नकारात्मक पुनर्बलन (negative reinforcement):जैसे दण्ड देना, मना करना या डाटना आदि ।

اگر کسی ذی روح کو مثبت کمک دی جائے، تو وہ اس عمل کو دہراتا ہے اور اگر منفی کمک دی جائے تو وہ اس عمل کو نہیں دہراتا ہے، جیسے کہ اگر کوئی بچہ باہر جاکر خودسے سبزی یا پانی لایا، تو اگر والدین اس کی تعریف کریں گے، تو بچہ کی حوصلہ افزائی ہوگی اور وہ آئندہ بھی اس طرح کے کام کرنے کی کوشش کرے گا؛ لیکن اگر والدین اس عمل پر اس کو ڈانٹا یا مار پیٹ کیا، تو آئندہ بچہ اس کا کو نہیں کرے گا۔

प्राणी को यदि सकारात्मक पुनर्बलन दिया जाता है तो प्राणी क्रिया को दोहराता है और यदि नकारात्मक पुनर्बलन दिया जाता है तो प्राणी क्रिया को नहीं दोहराता

 کمک شیڈول

पुनर्बलन अनुसूची
reinforcement schedule

: یہ دو طرح کی ہوتی ہے

نمبر ایک: مسلسل کمک کا نظام الاوقات:- اس میں، جب بھی عمل کیا جاتا ہے تو کمک دی جاتی ہے، جیسے کہ ہر سوال کو حل کرنے پر بچے کی تعریف کرنا۔

यह दो प्रकार की होती है :
1. सतत पुनर्बलन अनुसूची (Continuous Reinforcement Schedule):- इसमें जब-जब क्रिया होती है तो पुनर्बलन दिया जाता है, जैसे प्रत्येक सवाल हल करने पर बच्चे की तारीफ करना

نمبر دو: جزوی تقویت کا نظام الاوقات:- اس میں ہر عمل کے لیے کمک نہیں دیجاتی؛ بلکہ کچھ اعمال کے لیے دیجاتی ہے، جیسے کہ تمام سوالات کے بجائے صرف کچھ سوالات پر تعریف کرنا۔

2.आंशिक पुनर्बलन अनुसूची (Partial Reinforcement Schedule) :- इसमें हर क्रिया के लिए पुनर्बलन नहीं दिया जाता बल्कि कुछ क्रियाओ के लिए दिया जाता है, जैसे सभी सवालो की जगह सिर्फ कुछ सवालो पर तारीफ करना

 نفسیاتی سماجی ترقی کا نظریہ

मनोसामाजिक सिद्धांत

Psycho-Social Development

یہ نظریہ ایرک ایرکسن کے ذریعہ پیش کیا گیا ہے۔ ان کا بنیادی مقصد یہ تھا کہ بچے کس طرح ذاتی شناخت تیار کرتے ہیں۔ ان کے مطابق پوری زندگی 8 مراحل سے گزرتی ہیں۔

यह सिद्धांत इरिक ऐरिक्सन (Erik Erikson) द्वारा प्रतिपादित किया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य बच्चो में व्यक्तिगत पहचान कैसे होती है، उस पर था। इनके according पूरा जीवन 8 step से होकर गुजरता है।

مرحلہ نمبر ایک: اعتماد بمقابلہ بدگمانی ( پیدائش سے پندرہ یا اٹھارہ مہینہ) جن بچوں کو اپنے والدین سے پیار ملتا ہے، ان میں اعتماد کا جذبہ پیدا ہوتا ہے۔

 دوسری طرف جن بچوں کو والدین سے پیار نہیں ملتا وہ رونا شروع کر دیتے ہیں، اس عمل کی وجہ سے بچوں میں بداعتمادی پیدا ہونے لگتی ہے۔

1) विशवास बनाम अविशवास (Trust Vs Mistrust) [0-1.5/2 वर्ष] जिन बच्चो को माता-पिता से प्यार आदि मिलता है, उनमें विशवास का भाव विकसित होता है। दूसरी तरफ जिन बच्चो को माता-पिता का प्यार आदि नहीं मिलता तो वह रोना बिलखना शुरू कर देते है। इस क्रिया से बच्चो में अविशवास उत्तपन होना शुरू हो जाता है।

مرحلہ نمبر دو: خود مختاری بمقابلہ شرم / شک (اٹھارہ ماہ سے تین سال) خود مختاری کا مطلب ہے 'خود' یعنی جب بچے خود کھانے اور کپڑے پہننے کو ترجیح دینے لگیں۔ اگر وہ اب دوسروں پر انحصار نہیں کرنا چاہتے تو اسے خود مختاری کہا جاتا ہے۔ دوسری طرف، جب بہت سخت والدین انہیں کام کرنے پر ڈانٹتے ہیں، تو وہ بچے خود شکوک محسوس کرتے ہیں۔

(2) स्वायता बनाम शर्म / लज्जा शक (Autonomy vs Shame /Doubt) (बच्चा वर्ष 18 माह से 3वर्ष तक) स्वायता का अर्थ है' स्वयं' से अर्थात जब बच्चे खुद से खाना, कपडा पहनना ज्यादा पसंद करने लगते हैं। वे अब दूसरो पर निर्भर रहना नहीं चाहते है तो यह स्वायता कहलाता है। दूसरी और बहुत ही सख्त माता-पिता जब काम करने पर डांटते है तो वे बच्चे अपने ही अंदर शक का अनुभव करते है।

مرحلہ نمبر تین:اقدام بقابلہ جرم (تین سال سے چھ سال تک) جب بچے کی سمجھنے کی صلاحیت تھوڑی سی پروان چڑھتی ہے، تو اس کا تجسس بڑھ جاتا ہے،  وہ بہت متجسس ہو جاتا ہے؛ کیونکہ وہ متجسس ہے اور وہ پہل کرتا ہے۔ 

 دوسری طرف، جب والدین اس کے تجسس کو دباتے ہیں یا اسے ایک نقطے دیتے ہیں، جب احساس جرم پیدا ہونے لگتا ہے۔

(3) पहल बनाम / दोष (Initiative vs Guilt) [3 - 6 वर्ष] जब बच्चे में समझने की क्षमता का थोड़ा विकास हो जाता है तो उसमे जिज्ञासा (Curiosity) बढ़ जाती है। वह बहुत ज्यादा उत्सुक हो जाता है। उत्सुक होने की वजह से वेह पहल करता है। दूसरी तरफ जब माँ-बाप उसकी उत्सुकता को दबा देते है या उसे डॉट देते है तो दोष भाव (Guilt feeling) उत्त्पन होना शुरू हो जाता है।

مرحلہ نمبر چار: محنت بمقابلہ کمتری[6-12 سال] [بچپن کے آخری مرحلے] اس عمر میں بچہ والدین کے تمام کام کرنے کی کوشش کرتا ہے، اس لیے اسے محنت کہا جاتا ہے۔ دوسری طرف اگر آپ بچے کو کوئی کام دیں اور بچے کی کام کرنے کی صلاحیت کم ہو، تو وہ وہ کام نہیں کر پائے گا، اس لیے وہ احساس کمتری کا شکار ہونے لگتا ہے۔

(4) परिश्रम बनाम हीनता (Industry vs Inferiority) [6-12 वर्ष] [उत्तरबाल्य अवस्था] इस आयु में बच्चा माँ बाप का हर काम करने की कौशिश करता है। अतः इसे परिश्रम कहते है। दूसरी तरफ अगर आपने बच्चे को कोई काम दिया और उस बच्चे की काम करने की क्षमता कम है तो वह उस काम को नही कर पायेगा इसलिए उसमे हीनता आनी शुरू हो जाती है।

مرحلہ نمبر پانچ: شناخت بمقابلہ کنفیوژن [12-18 سال] [نوعمر: اس عمر میں، بچوں میں اپنی شناخت بنانے کے لیے بہت زیادہ شوق ہوتا ہے۔ دوسری طرف جب بچے بامقصد کام نہیں کرتے تو ان کے لیے بہت سے راستے کھل جاتے ہیں۔ 

(5) पहचान बनाम भान्ति (Identity vs Confusion) [12-18 वर्ष] [किशोर इस आयु में बच्चो में अपनी पहचान बनाने की बहुत ज्यादा उत्सुकता होती है। दूसरी तरफ जब बच्चे उ‌द्देश्यपूर्ण काम नहीं करते तो उनके पास बहुत सारे रास्ते खुल जाते है।

مرحلہ نمبر چھ: قربت بمقابلہ تنہائی [18-35] [سابقہ ​​قربت میں انسان دوسروں کے ساتھ بھرپور تعلقات استوار کرتا ہے۔ بھرپور تعلقات رکھنے کی وجہ سے وہ دوسروں کے ساتھ ہم آہنگی میں رہتا ہے، جسے مباشرت کہتے ہیں۔ دوسری طرف جب انسان دوسروں کے ساتھ اچھے تعلقات قائم نہیں رکھ پاتا تو وہ سب سے الگ تھلگ رہتا ہے،  جسے تنہائی کہتے ہیں۔

(6) आत्मीयता बनाम अलगाव (Intimacy vs isolation) [18-35] [पूर्व आत्मीयता में आदमी दूसरो के साथ धनिष्ट सम्बन्ध बनता है। धनिष्ट सम्बन्ध होने की वजह से वह दूसरो के साथ मिल-जुल कर रहता है जिसे आत्मीयता कहते है। दूसरी तरफ जब आदमी दूसरो के साथ धनिष्ट सम्बन्ध नहीं बना पाता तो वह सबसे अलग रहता है। जिसे अलगाव कहते हैं।

مرحلہ نمبر سات: جنریٹیوٹی بمقابلہ جمود [35-65] [درمیانی بالغیت] پیداوری میں ہم دوسرے لوگوں کے بارے میں زیادہ سوچتے ہیں، دوسروں کے لیے اچھا کرنے کے بارے میں سوچتے ہیں۔ دوسری طرف  جب لوگوں میں اس سوچ کی کمی ہوتی ہے، تو ترقی نہیں ہوتی، وہ جمود کا شکار ہو جاتے ہیں۔

(7) जननात्मकता बनाम स्थिरता (Generativity vs Stagnation) [ 35-65] [मध्य-व्यस्कावस्था] जननात्मकता में हम दूसरे लोगो के बारे में ज्यादा सोचते है, दूसरो का भला करने की सोचते है, दूसरी तरफ-जब लोगो में इस सोच का विकास नहीं होता तो उनमें स्थिरता आ जाती है।

مرحلہ نمبر آٹھ: سالمیت بمقابلہ مایوسی [65 سے اوپر] اس عمر میں انسان کی اکثر خواہشات پوری ہو چکی ہوتی ہیں،  اپنے مستقبل کے بجائے اب اسے اپنا ماضی یاد آتا ہے کہ اس نے کتنی کامیابیاں حاصل کیں اور کتنی ناکامیاں۔

  اگر اسے زیادہ کامیابیاں ملیں، تو اسے کمال کہتے ہیں،  اگر کسی کو زیادہ کامیابی نہیں ملی، تو وہ مایوس ہو جاتا ہے۔

(8) सम्पूर्णता बनाम निराशा (Integrity vs Despair) [65 से ऊपर] [प्रोढ़ावस्ता] इस उम्र में आदमी की अधिकतम इच्छाएँ पूर्ण हो चुकी होती है। वह अब अपने भविष्ये की बजाये अपने बीते दिनों को याद करता है कि उसकी कितनी सफलताएँ हुई और कितनी असफलताएँ हुई। यदि उसकी सफलताएँ ज्यादा मिलती है तो उसे सम्पूर्णता कहते है। अगर किसी ने ज्यादा सफलताएँ हासिल नहीं कि है तो उसमे निराशा आ जाती है।

1 Comments

  1. السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبرکاتہ

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