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جین پیازے: علمی ترقی کا نظریہ, जीन पियाजे: संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत

Jean Piaget’s Cognitive Development Theory(guldastakafi.blogspot.com)

 جین پیازے: علمی ترقی کا نظریہ

जीन पियाजे: संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत
Jean Piaget’s Cognitive Development Theory

جین پیازے سوئٹزرلینڈ کے ماہر نفسیات تھے۔

जीन पियाजे स्विट्ज़रलैंड के मनोवैज्ञानिक थे।

پیازے کا خیال ہے کہ جیسے جیسے بچے حیاتیاتی پختگی کو پہنچتے ہیں، وہ اپنے ذہنوں میں اشیاء کے بارے میں تصورات تشکیل دیتے ہیں۔

पियाजे का मानना है की जैसे-जैसे बच्चो में जैविक परिपक्वता (Biological Maturation) आती है वैसे-वैसे वह वस्तुओ के बारे में अपने दिमाग में concept बना लेते है।

پیازے کے مطابق بچے سرگرم علم تخلیق کار اور چھوٹے سائنسدان ہیں، جو دنیا کے بارے میں اپنے نظریات تیار کرتے ہیں اور تخلیق کرتے ہیں۔

पियाजे के according बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता तथा नन्हे वैज्ञानिक है، जो संसार के बारे में अपने सिद्धांतो की रचना करते है।

 پیازے کے مطابق بچوں کی سوچ مقدار میں نہیں بلکہ اقسام میں بڑوں سے مختلف ہوتی ہے۔

पियाजे के according बच्चों को thinking, adult के प्रकार (types) में अलग होती है ना की quantity में।

 علمی ترقی کا تصور

संज्ञानात्मक विकास की अवधारणा
Concept of Cognitive Development

نمبر ایک: موافقت: ماحول کے مطابق خود کو ڈھالنا موافقت کہلاتا ہے۔  اس کے دو عمل ہیں۔

1. अनुकूलन (Adaptation): वातावरण के अनुसार अपने आप को ढालना अनुकूलन कहलाता है। इसकी दो प्रक्रिया होती है।

 الف: انضمام: پچھلے علم کو نئے علم سے جوڑنا انضمام کہلاتا ہے۔

(i) आत्मसात्करण (Assimilation): पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान के साथ जोड़ना आत्मसात्करण कहलाता है।

ب: ہم آہنگی: سابقہ ​​علم کو تبدیل کر کے ماحول کے مطابق نئے طریقے سے ایک نئی جانکاری تیار کرنا، ہم آہنگی (اکومیڈیشن)  کہلاتا ہے۔

(ii) समायोजन (Accommodation): पूर्व ज्ञान में परिवर्तन करके वातावरण के साथ तालमेल बिठाना समायोजन कहलाता है।

 توازن: اس کے ذریعے بچہ انضمام اور ایڈجسٹمنٹ (ہم آہنگی) کے عمل کے درمیان توازن برقرار رکھتا ہے۔

साम्यधारण / संतुलन (Equilibration): इसके द्वारा बच्चा आत्मसात्करण और समायोजन की प्रक्रियाओ के बीच संतुलन कायम करता है।

اسکیما: جب کوئی انسان اپنے ذہن میں پہلے سے موجود چیزوں کو استعمال کرتا ہے اور کسی موضوع کے بارے میں خیال پیدا کرتا ہے تو اسے اسکیما کہتے ہیں۔ 

اسکیما کی نوعیت اور ردعمل انسانی بچے میں فطری ہوتی ہے۔

स्कीमा (Schema): मानव के दिमाग में जो चीज़े पहले से स्टोर होती है वह उनका प्रयोग करके किसी विषय के प्रति एक धारना बनाता है तो इसे स्कीमा कहते है। मानव शिशु में स्कीमा प्रवृति और प्रतिक्रिया जन्म जात होती है।

 تنظیم:  پیازےکے نظریہ میں علمی نظام کے لیے اسکیموں کو دوبارہ ترتیب دینا، انہیں اسکیموں سے جوڑنا تنظیم کہلاتا ہے۔

Organisation (संगठन): पियाजे के सिद्धांत में संज्ञानात्मक प्रणाली के लिए स्कीमाओं को पुनर्व्यवस्थित करना, उन्हें स्कीमाओं से जोड़ने को संगठन कहा जाता है

پیازے نے علمی ترقی کے چار مراحل بیان کیے ہیں۔

पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएं बताई है
Piaget described four stages of cognitive development

نمبر ایک: حسی موٹر اسٹیج (پیدائش سے دو سال)

الف: اس مرحلے میں بچہ اپنے حواس کے ذریعے سیکھتا ہے۔

* इस अवस्था में बच्चा अपनी ज्ञानेन्द्रियो के माध्यम से सीखता है।

ب: اس میں "آبجیکٹ پرمننس" کا معیار ہے  یعنی بچہ اپنے ذہن میں اشیاء کے نقوش پیدا کرنے لگتا ہے، جس کی وجہ سے وہ چھپی ہوئی اشیاء کو بھی تلاش کر لیتا ہے۔

*इसमें "वस्तुस्थायित्व" (Object Permanence) का गुण आ जाता है। यानी बच्चा अपने दिमाग में वस्तुओ की छाप बनाना शुरू कर देता है जिससे वह छिपी हुई वस्तु को भी ढूंढ लेता है।

نمبر دو: پری آپریشنل مرحلہ (دو  سے سات سال): یہ عمل کرنے سے پہلے کا مرحلہ ہے۔  اس میں بچہ اپنے سامنے آنے والی چیزوں کو دیکھ اور سمجھ سکتا ہے، لیکن کوئی اقدام نہیں کر پاتا۔

2. पूर्व - संक्रियात्मक अवस्था / Pre-Operational Stage (2-7 वर्ष): यह क्रिया करने से पहले की अवस्था है। इसमें बच्चा सामने आने वाली चीजों को देख पाएगा, समझ पाएगा, लेकिन कोई क्रिया नहीं कर पाएगा।

الف:  اس مرحلے میں بچہ علامتوں کے استعمال میں ماہر ہو جاتا ہے۔ مثال کے طور پر بچہ سائیکل کا لفظ سنتے ہی اس کے ذہن میں سائیکل کی تصویر بن جاتی ہے۔

*इस stage में बच्चा प्रतीकों (symbols) का use करने में निपुण हो जाता है। जैसे cycle शब्द सुन कर उसके mind में cycle की एक image बन जाती है।

ب: اس مرحلے میں بچہ کے اندر مقصد کے مطابق رویے کی صلاحیت آ جاتی ہے۔

*इस stage में लक्ष्य निर्देशित व्यवहार (goal directed behavior) की क्षमता आ जाती है।

ج: جب بچہ جاندار اور غیر جاندار چیزوں میں فرق کرنے سے قاصر ہوتا ہے۔

* जीववाद (Animism): जब बच्चा सजीव और निर्जीव वस्तुओ में अंतर नहीं कर पाता।

د: جب بچہ یہ سوچنے لگتا ہے کہ وہ جو کچھ بھی کر رہا ہے اور سوچ رہا ہے وہ صحیح ہے۔ 

* अहंकेंद्रित (Egocentrism): जब बच्चा यह सोचना शुरू कर देता है की जो वह कर रहा है, सोच रहा है, वह सब ठीक है।

ذ: ناقابل واپسی:- اس میں بچہ اشیاء، اعداد، مسائل وغیرہ کو الٹا کرنا نہیں سیکھتا۔

*अपलटावी (Irreversibility):- इसमें बच्चा वस्तुओ, संख्याओं, समस्या आदि को उलटना पलटना नहीं सीखता।

ر:اس مرحلے میں پیسے، فاصلے، وزن، اونچائی، ترتیب کا تعین کرنے کی صلاحیت وغیرہ کا فقدان  ہوتا ہے۔

*मुद्रा संप्रत्यय, दूरी, भार, ऊंचाई, क्रम निर्धारण की योग्यता आदि के concept की कमी इसी अवस्था में होती है।

س: سنٹریشن:- ایک وقت میں کسی چیز کی صرف ایک خصوصیت پر توجہ دینے کے رجحان کو سینٹریشن کہتے ہیں۔

*केन्द्रीकरण (centration) :- एक समय में किसी वस्तु की केवल एक विशेषता पर ध्यान दे पाने की प्रवृत्ति को centration कहते है।

ص: تحفظ: اگر کسی چیز کا سائز یا شکل بدل جائے، تو اس کی مقدار پر کوئی اثر نہیں پڑتا، لیکن بچہ اس بات کو نہیں سمجھ پاتا۔

* संरक्षण (conservation) अगर किसी वस्तु के size या shape में change करदे तो उसकी quantity पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन बच्चा इसको समझ नहीं पाता।

ط: سلسلہ بندی: اس میں بچہ اشیاء/حقائق کو ان کی شکل میں رکھنا سیکھ نہیں پاتا۔

*क्रमबद्धता (seriation) इसमें बच्चा वस्तुओ / तथ्यों को उनके आकार में रखना नहीं सीख पाता है।

نمبر تین:کنکریٹ آپریشنل مرحلہ (سات سے گیارہ سال):- اس مرحلے میں بچہ صرف سامنے رکھی چیزوں کو دیکھ کر کچھ کر سکتا ہے یا ان کے بارے میں سوچنا شروع کر دیتا ہے۔ اس مرحلے میں تصور کی معکوسیت، حیاتیات، کرنسی، وزن، تحفظ، ترتیب دینے کی صلاحیت وغیرہ کی خصوصیات وجود میں آتی ہیں۔

3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था / concrete operational stage (7-11):- इस अवस्था में बच्चा सामने रखी हुई चीजों को देखकर ही कुछ कर सकता है या उन पर चिंतन करना शरू कर देता है। इस अवस्था में अपलटावी, जीववाद, मुद्रा, भार, संरक्षण, क्रमबद्धता की योग्यता आदि concept का गुण आ जाता है।

الف: دلکش استدلال (فرضی سوچ): یہ اس مرحلے میں بھی آتا ہے یعنی جب بچہ مثالوں کی بنیاد پر استدلال شروع کرتا ہے، مثال کے طور پر: کیا درخت ہمارے لیے ضروری ہے یا نہیں؟

*आगमनात्मक तर्कणा (hypothetical thinking): यह भी इसी अवस्था में आता है। यानी जब बच्चा उदाहरण के ऊपर आधारित होकर तर्क करने लगता है। exampal: पेड़ जरुरी है या नहीं हमारे लिए बच्चा answer क्योकि इससे हमें oxygen मिलती है।

نمبر چار:رسمی آپریشنل مرحلہ (گیارہ سے پندرہ سال) :- یہ ادراک کا اعلیٰ ترین مرحلہ ہے۔

4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11-15 वर्ष) Formal Operational Stage :- यह संज्ञान की सर्वोच्च अवस्था है।

الف: استخراجی استدلال: اس میں بچہ قواعد پر استدلال شروع کر دیتا ہے۔

* निगमनात्मक तर्कणा: इसमें बच्चा नियमो के ऊपर तर्क करने लगता है।

ب:اس میں بچہ خلاصہ سوچنا شروع کر دیتا ہے۔

* इसमें बच्चा अमूर्त चिंतन करने लग जाता है।

پیازے کے نظریہ پر تنقید:  پیازےنے ذہنی نشوونما کے مراحل کی ترتیب کو غیر تبدیل شدہ قرار دیا ہے، لیکن اگر بچوں کو اچھا ماحول دیا جائے، تو وہ اپنی حالت کی استعداد سے زیادہ سیکھ سکتے ہیں۔

* पियाजे के सिद्धांत की आलोचना पियाजे ने मानसिक विकास के चरणों के क्रम को अपरिवर्तनशील बताया है लेकिन + अगर बच्चो को अच्छा वातावरण दिया जाये तो वह अपनी अवस्था की क्षमता से अधिक सीख सकता है

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