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لارنس کوہلبرگ کا اخلاقی ترقی کا نظریہ, लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिकता का सिद्धांत

Lawrence Kohlberg's theory of Moral Development

لارنس کوہلبرگ کا اخلاقی ترقی کا نظریہ

लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिकता का सिद्धांत 
Lawrence Kohlberg's theory of Moral Development 

 کوہلبرگ ایک امریکی ماہر نفسیات تھے، جنہوں نے نظریہ اخلاق یا اخلاقی ترقی کا نظریہ دیا۔

 कोहलबर्ग (Kohlberg) अमेरिका के एक मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने नैतिकता का सिद्धांत(Theory of morality) या नैतिक विकास का सिद्धांत (Theory of Moral Development) दिया।

اخلاقیات: یہ وہ خوبی ہے جس سے ہم صحیح اور غلط کی پہچان کرتے ہیں۔ بچہ اخلاقیات اور بداخلاقی کو اپنے سماجی ماحول سے ہی جانتا ہے۔

 नैतिकता (Morality):- यह वह गुण है जिससे हमें सही और गलत की पहचान होती है। बच्चा अपने सामाजिक परिवेश से ही नैतिकता और अनैतिकता को जानता है।

 ہنز کی کہانی

 ہنز کی کہانی ایک خود ساختہ قصہ ہے، جو کوہلبرگ صاحب نے بچوں کو سنایا:’’ ایک مرتبہ ہنز نامی آدمی کی بیوی بہت سخت بیمار پڑگئی، جس کا علاج کسی کے پاس نہیں تھا سوائے ایک آدمی کے جن پاس ایک دوا تھی، جسے اس آدمی نے بہت محنت مشقت اور پوری جمع پونجی لگاکر تیار کیا تھا یعنی اس کی عمر کی لاگت تھی، ہنز کی بیوی کا علاج اسی دوا سے ہوسکتا ہے ورنہ وہ مر جائے گی۔

ہنز اس آدمی (ڈاکٹر) کے پاس گیا اور کہا کہ وہ دوا مجھے دے دو، تاکہ میری بیوی کا علاج ہو سکے، اس آدمی نے اس دوا کی بہت قیمت بتائی، کیوں اس نے اس دوا کو بنانے میں پوری عمری لگا دی تھی، ہنز کے پاس اتنا پیسہ بھی نہیں تھا اور اس طرح کی دوا کہیں اور مل بھی نہیں سکتی تھی اور اگر دوا نہیں ملتی تو اس کی بیوی مر جاتی ،لہذا اس نے دوا چوری کرنے کی ٹھان لی، تاکہ اپنی بیوی کو بچا سکے۔‘‘اس کہانی کو سنانے کے بعد کوہلبرگ نے بچوں سے رائے لیا کہ کیا ہنز نے دوا چوری کرکے صحیح کیا یا غلط، تو کچھ بچوں نے کہا کہ صحیح کیا، اس لیے کہ جان سے قیمتی کوئی چیز تھوڑی ہوتی ہے اور اگر وہ نہیں ملتی تو ہنز کی بیوی مرجاتی۔

کچھ بچوں نے کہا کہ چوری کرنا غلط بات ہے اور وہ آدمی (ڈاکٹر جس کے پاس دوا تھا) دوا کو بنانے میں پوری زندگی اور مال و دولت لگادیا تھا ، دوا کی چوری کی وجہ سے وہ برباد ہوگیا، اس لیے ہنز نے جو کام کیا وہ غلط ہے، کوہلبرگ صاحب کے سامنے دو طرح کی باتیں آئیں، جیسا کہ آپ نے بھی جانا۔ 

हिंज़ की कहानी
हिंज की कहानी एक आत्मकथात्मक कहानी है، जिसे श्री कोहलबर्ग ने बच्चों को बताया: "एक बार हिंज नाम के एक आदमी की पत्नी बहुत बीमार पड़ गई, जिसका कोई इलाज नहीं था सिवाय एक आदमी के पास जिसके पास एक दवा थी, जिसे उस व्यक्ति ने बड़ी मेहनत और पूरी ज़िन्दी दाव पर लगा कर तैयार किया था यानी उसके पूरी जीवन की कीमत थी, जिससे हिंज़ की पत्नी का इलाज हो सकता था, अन्यथा वह मर जाती।
हिंज़ उस आदमी (डॉक्टर) के पास गया और बोला कि मुझे वह दवा दे दो जिससे मेरी पत्नी ठीक हो जाएगी अन्यथा वह मर जाएगी, उस व्यक्ति ने बहुत ज़्यादा क़ीमत कहा और हिंज़ के पास इतना रूपये नहीं था और ना ही यह दवा कहीं और मिल रहे थी और अगर दवा नहीं मिलती तो उसकी पत्नी मर जाती, इसलिए उसने अपनी पत्नी को बचाने के लिए दवा चुराने का फ़ैसला किया। कहानी सुनाने के बाद, कोहलबर्ग ने बच्चों से पूछा कि दवा चुराकर हिंज़ ने सही किया अथवा या गलत?
कुछ बच्चों ने कहा कि जीवन से बढकर कोई चीज़ नहीं है, इसलिए उसने चोरी करके सही किया, वरना उसकी बीवी मरजाती।
कुछ बच्चों ने कहा कि चोरी करना गलत है और उस आदमी (जिस डॉक्टर के पास दवा थी) ने दवा बनाने में अपना जीवन और धन लगाया था, दवा चोरी करने के कारण वह बर्बाद हो गया। श्री कोलबर्ग जी ने यह कहानी सुनाकर बच्चों से सलाह लिए, तो बच्चों ने दो तरह का मशवरह दिया, जैसा के कहानी से मालूम हुआ।

مذکورہ کہانی سے کچھ باتیں نکلتی ہیں، جو قابل غور ہے، اس لیے ان باتوں کو یہاں ذکر کیا جا رہا ہے:

उपरोक्त कहानी से कुछ बातें सामने आती हैं, जो विचारणीय हैं, इसलिए उन बातों का उल्लेख यहां किया जा रहा है:

نمبر ایک:اخلاقی مخمصہ (تذبذب):- صحیح اور غلط کے بارے میں فیصلہ نہ کرنے کی صورت حال کو اخلاقی مخمصہ(تذبذب) کہتے ہیں۔

مثال کے طور پر اگر ہنز چوری کرتا ہے، تو پولیس اسے پکڑ لے گی اور اگر وہ نہیں کرتا، تو اس کی بیوی مر جائے گی۔

(i) नैतिक दुविधा (Moral Dilemma) :- सही और गलत के बारे में decision ना लेने की स्थिति नैतिक दुविधा कहलाती है।
Example : हिंज अगर चोरी करेगा तो पुलिस पकड़ लेगी और नहीं करेगा तो उसकी बीवी मर जाएगी ।

نمبر دو: اخلاقی استدلال (حتمی فیصلہ): صحیح اور غلط کے بارے میں فیصلے کرنے میں شامل عمل کو اخلاقی استدلال کہتے ہیں۔  

جیسے کہ صحیح اور غلط کے درمیان انتخاب کرتے ہوئے ہنز نے چوری کا انتخاب کیا۔

(II) नैतिक तर्कणा (Moral Reasoning): सही और गलत के बारे में decision लेने में शामिल प्रक्रिया को नैतिक तर्कणा कहते है। सही और गलत में से किसी एक को चुनना जैसे हिंज ने चोरी को चुना

 کوہلبرگ نے اخلاقیات کے تین درجے بتائے ہیں

कोहलबर्ग ने नैतिकता के 3 स्तर बताए हैं:
Kohlberg has described 3 levels of morality:

نمبر ایک: قدامت پسندی (روایت پرستی)سے پہلے کی اخلاقیات کی سطح (چار سے دس سال):- اس مرحلے میں بچے صحیح اور غلط کے بارے میں نہیں جانتے۔  اس مرحلے میں، اخلاقی استدلال دوسرے لوگوں کے معیارات کے مطابق ہوتا ہے۔

(1) प्राक रूढ़िगत नैतिकता का स्तर / Pre Conventional Stage (4 - 10 वर्ष) :- इस अवस्था में बच्चो को सही गलत के बारे में पता नहीं होता। इस अवस्था में नैतिक तर्कणा दूसरे लोगो के मानकों के अनुसार होती है।

 اسے دو حصوں میں تقسیم کیا گیا ہے:

इसे दो भागो में बांटा है:

الف:سزا اور فرمانبرداری:- اس میں بچے کے اخلاق کی بنیاد سزا اور اطاعت پر ہے، جب ہنز چوری کرتا ہے، تو بچوں نے سوچا کہ اگر اس نے چوری کی ہے تو اسے سزا ملے گی۔

(i) दंड एवं आज्ञा - पालन उन्मुखता (Punishment & Obedience) :- इसमें बच्चे की नैतिकता सजा और आज्ञा पालन पर आधारित होती है। जब हिंज ने चोरी की तो बच्चो ने सोचा की अगर वह चोरी करेगा तो उसे सजा मिलेगी।

ب: آلہ کار رشتہ داری اور واقفیت:- اس حالت کو "جیسا کو تیسا" بھی کہا جاتا ہے، کیونکہ اس عمر میں کوئی اس کے ساتھ جس طرح برتاؤ کرتا ہے، وہ بھی اس کے ساتھ اسی طرح کا برتاؤ کرتا ہے۔ مثال کے طور پر: ایک بچے نے دوسرے بچے کی پنسل توڑ دی، تو دوسرے بچے بھی اس کا قلم توڑ دے گا، کیوں کہ اس نے اس کا پینسل توڑ دیا ہے۔

(ii) साधनात्मक सापेक्षता तथा उन्मुखता (Instrumental Relativists individualism):- इस अवस्था को "जैसे को तैसे" भी कहा जाता है क्योकि इसमें जैसा व्यवहार कोई उसके साथ करेगा वैसा ही वह खुद भी करेगा। Ex : एक बच्चे ने दूसरे बच्चे की पेंसिल तोड़ी तो दूसरे बच्चे ने भी उसका पेन तोड़ दिया ।

نمبر دو: اخلاقیات کا روایتی مرحلہ [دس سے تیرہ سال]:- اس مرحلے میں بچہ دوسرے لوگوں کے معیارات کو اپناتا ہے اور ان کے مطابق صحیح ؍ غلط کا فیصلہ کرتا ہے۔

(2) रुढ़िगत नैतिकता का स्तर (Conventional Stage) [10-13 वर्ष]:- इस अवस्था में बच्चा दूसरे लोगो के मानकों को अपने अंदर समावेशित कर लेता है तथा उसी के according सही / गलत का निर्णय करता है।

 اسے بھی دو حصوں میں تقسیم کیا گیا ہے:

इसको भी दो भागो में बांटा है:

 الف: اچھا لڑکا/لڑکی بننے کی طرف مائل:- دوسروں کے ساتھ اچھا بن کر منظوری حاصل کرتا ہے۔

(i) अच्छा लड़का / लड़की बनने की उन्मुखता (Good boy and Good girl) :- दुसरो के साथ भला बन कर अनुमोदन अर्जित (earns approval) करता है।

ب:امن و امان کی سمت:- اس عمر میں بچے کے اندر امن و امان کو برقرار رکھنے کا احساس پیدا ہوتا ہے، کیونکہ اس کے والد اور سماج کے ذریعہ معلوم ہے کہ لال بتی پار کرتے ہوئے حادثہ ہو جاتا ہے یا پولیس پکڑ لیتی ہے، اس لیے وہ ایسا نہیں کرے گا۔

(ii) कानून एवं व्यवस्था उन्मुखता (Law and Order Orientation):- इसमें बच्चा कानून तथा सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की भावना विकसित करता है। क्योकि उसके पापा का accident हो गया था, Red Light पार करते हुए इसलिए वह ऐसा नहीं करेगा। 

نمبر تین: قدامت پسندی کے بعد کی اخلاقیات [تیرہ سال سے اوپر]:- اس میں فیصلہ خود کیا جاتا ہے نہ کہ معاشرے کے ذریعے اس بارے میں کہ کیا صحیح ہے اور کیا غلط۔

(3) उत्तर रूढ़िगत नैतिकता (Post Conventional Stage) [13 वर्ष से ऊपर] :- इसमें decision खुद से लिए जाते है ना की समाज के जरिये, की क्या सही है और क्या गलत।

 اس کے  بھی دو مراحل ہیں:

 इसकी भी  दो अवस्थाएं है:

الف:سماجی معاہدہ کی واقفیت:- اس میں نوعمروں کا خیال ہے کہ قوانین لوگوں کی بھلائی کے لیے ہیں، اگر کوئی اصول کسی کو نقصان پہنچاتا ہے تو ایسے قوانین کو توڑ دینا چاہیے، اگر لال بتی توڑنے سے کسی کی جان بچ سکتی ہے تو یہ قانون توڑ دو۔

(i) सामाजिक अनुबंध उन्मुखता (Social Contract Orientation) :- इसमें किशोर यह मानते है कि नियम लोगो कि भले के लिए है, अगर किसी नियम से किसी का नुकसान होता है तो ऐसे नियमो को तोड़ देना चाहिए। अगर red Light तोड़कर उसके पापा कि जान बच सकती है तो उसे तोड़ दो।

ب:عالمگیر اخلاقی اصولوں کی سمت بندی:- اس میں نوجوان دوسروں کے خیالات کے مطابق نہیں بلکہ اپنے معیار کے مطابق برتاؤ کرتا ہے۔  اس میں نوجوان دوسروں کے فائدے کے لیے اپنی جانیں خطرے میں ڈال دیتے ہیں۔

(ii) सार्वभौमिक नैतिक सि‌द्धांत उन्मुखता (Universal Ethical Principles Orientation) :- इसमें किशोर दुसरो के विचारो से नहीं बल्कि अपने खुद के मानकों के अनुसार व्यवहार करता है। इसमें किशोर दुसरो के फायदों के लिए अपनी जान पर भी खेल जाते है।

تنقید:کوہلبرگ کے اس نظریہ پر کیرول گیلیگن  نام کی ایک عورت نے تنقید کرتے ہوئے کہا کہ  کوہلبرگ صاحب نے اپنے تجربے میں خواتین کو کم ترجیح دی تھی۔

*कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना इनके सिद्धांत की आलोचना कैरोल गिलिगन ने की थी, उन्होंने तर्क दिया की कोहलबर्ग ने अपने experiment में महिलाओ को कम प्राथमिकता दी थी।

تنقید: مرد اور عورت کے اخلاقی استدلال اور ثقافت و تہذیب میں فرق کو بھی اہمیت نہیں دی گئی۔


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