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تدریس کے طریقے، Teaching Methods،शिक्षण की विधियां

تدریس کے طریقے، Teaching Methods،शिक्षण की विधियां

تدریس کے طریقے

शिक्षण की विधियां
Teaching Methods

نمبر ایک: مسئلہ حل کرنے کا طریقہ:- اس میں طلبہ کو ایک مسئلہ دیا جاتا ہے، جس کا حل طلبا تلاش کرتے ہیں اور علم حاصل کرتے ہیں،  مسئلہ کے حل میں ہی اشارہ دیا گیا ہوتا ہے۔

1.समस्या समाधान विधि (problem solving method):- इसमें students को एक problem दी जाती है जिसका समाधान, students खोजते है और knowledge लेते है। समस्या समाधान में ही एक hint दिया होता है।

 مسئلہ حل کرنے  کے اقدامات

समस्या समाधान विधि Steps:

نمبر ایک: مسئلہ کا انتخاب کرنا

نمبر دو: مسئلہ کی وجوہات

2 समस्या के कारण  (Causes of the problem)

نمبر تین: مسئلہ سے متعلق معلومات جمع کرنا

3 समस्या से related information को collect करना

نمبر چار مسئلہ حل کرنا

4 समस्या का समाधान ( Solve the problem)

نمبر پانچ: حل کا عملی اطلاق

5 समाधान का व्यावहारिक प्रयोग  (Practical application of the solution)

نوٹ: صرف ایک طریقے سے کسی مسئلے کی نمائندگی کرنے میں پھنس جانا ریسپانس سیٹ کہلاتا ہے۔

*किसी समस्या को एक ही तरीके से प्रस्तुत represent करने पर अटक जाना अनुक्रिया समुच्य response set कहलाता है

نوٹ: اچھے مسئلے کو حل کرنے والوں کو جواب کی دوبارہ ترتیب کا فقدان ہونا چاہیے اور مختلف سوچوں سے گریز کرنا چاہیے

* उत्तम समस्या समाधान कर्ताओ के लिए reponse re set में कमी और अपसारिक चिंतन Diverger.ninking ना चाहिए।

نوٹ: مسئلہ کو حل کرنے کا وہ نظام جس میں مقصد سے شروع ہو کر حل تک پہنچنے کے لیے پیچھے کی طرف بڑھنا کام کرنے والی پسماندہ حکمت عملی کہلاتا ہے۔

* समस्या के समाधान की वह प्रणाली जिसमे लक्ष्य से आरम्भ कर के पीछे की तरफ चल कर solution तक पहुंचा जाता है वह पश्चगामी कार्यकारी युक्ति (working backward strategy) कहलाती है।

نمبر دو:استقرائی طریقہ:- اس طریقہ میں، تجربات، مثالوں اور تجربات کا براہ راست مطالعہ کرکے قواعد اخذ کیے جاتے ہیں، یہ طریقہ تدریس ایک "طالب علم پر مبنی" طریقہ ہے، جو "کرنے" کے ذریعے طلباء کے سیکھنے پر زور دیتا ہے۔

2. आगमन विधि (Inductive Method) :- इस विधि में सीधे अनुभवों, उदाहरणों तथा प्रयोगों का अध्ययन करके नियम निकाले जाते है। यह शिक्षण विधि" छात्र केंद्रित" विधि है, जो विद्यार्थियों को" करके सीखने" पर बल देती है।

  استقرائی طریقہ کار میں استدلال

आगमन विधि में तर्क करते हुए:

نمبر ایک: مثال سے اصول تک

1- उदाहरण से नियम की ओर (From example to rule)

نمبر دو: مجموعی سےجز تک

2- स्थूल से सूक्ष्म की ओर

نمبر تین: مخصوص سے عام تک

3- विशिष्ट से सामान्य की ओर

نمبر چار: معلوم سے نامعلوم تک

4- ज्ञात से अज्ञात की ओर

نمبر پانچ:ظاہری جسم سے باطنی جسم کی جانب

5- मूर्त से अमूर्त की ओर

نمبر چھ: براہ راست مشاہدے سے ثبوت کی طرف

6- प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर आगे बढ़ते हैं।

نمبر تین: استخراجی طریقہ: - اس طریقہ میں سب سے پہلے طلباء کو قواعد کا علم دیا جاتا ہے، اس کے بعد ان اصولوں کو "مثالیں" دے کر سمجھا جاتا ہے، اس طریقہ کو استاذ متعلق کہا جاتا ہے اور وہ  تمام قوانین کی وضاحت کرتے ہیں۔

3. निगमन विधि (Deductive Method) :- इस विधि में सर्वप्रथम विद्यार्थियों को नियमों का ज्ञान दे दिया जाता है इसके पश्चात" उदाहरण" देकर उन नियमों को समझाया जाता है यह विधि एक" शिक्षक केंद्रित" विधि कहलाती है इसमें शिक्षक ही सारे नियम सिखाते हैं।

 اس طریقے میں

इस विधि में

 نمبر ایک: شواہد سے ثبوت تک

i. प्रमाण से प्रत्यक्ष की ओर

نمبر دو: جز سے مجموعی تک

ii. सूक्ष्म से स्थूल की ओर

نمبر تین:  عام سے مخصوص تک

iii. सामान्य से विशिष्ट की ओर

نمبر چار:  نامعلوم سے معلوم تک

iv. अज्ञात से ज्ञात की ओर

 نمبر پانچ: قاعدہ سے مثال کی طرف

v. "नियम से उदाहरण की ओर" आगे बढ़ते हैं।

نمبر چار: پروجیکٹ کا طریقہ:- اس کا موجد "کیل پاٹرک" تھا۔ یہ طریقہ تجربہ پر مبنی ہے۔ یہ بچوں کی سماجی کاری پر خصوصی زور دیتا ہے۔ اس طریقے میں طالب علم آزادانہ طور پر کام کرتا ہے اور اپنے مسائل کو اپنے خیالات کی بنیاد پر حل کرتا ہے۔ یہ طریقہ حقیقت کے اصول پر کام کرتا ہے۔

4. प्रोजेक्ट विधि (Project method):- इसके प्रवर्तक "किल पैट्रिक" थे। यह विधि अनुभव केन्द्रित होती है। यह बालकों के समाजीकरण पर विशेष बल देती है। इस विधि में विद्यार्थी स्वतंत्र रूप से कार्य करता है एवं अपनी समस्याओं का हल अपने स्वयं के विचारों के आधार पर करता है। यह विधि वास्तविकता के सिद्धांत पर कार्य करती है

نمبر پانچ: براہ راست طریقہ:- اس طریقے میں بچے کو گرائمر کے قواعد سے آگاہ کیے بغیر زبان سکھائی جاتی ہے۔ اس طریقہ کار میں بچے کی مادری زبان کو بطور ثالث استعمال کیے بغیر دوسری زبان سکھائی جاتی ہے، یعنی مادری زبان کا سہارا لینے کے بجائے اس میں بار بار زبانی اور تحریری مشق کے ذریعے نئی زبان براہِ راست پڑھائی جاتی ہے۔ علاقائی زبان کا استعمال بھی نہیں کیا جاتا۔ اس طریقے میں بات چیت کے ذریعے زیادہ سے زیادہ سیکھنے پر زور دیا جاتا ہے تاکہ وہ قدرتی طور پر سیکھ سکیں۔

5. प्रत्यक्ष विधि (Direct method) :- इस विधि में बालक को बिना व्याकरण के नियमों का ज्ञान कराएं भाषा सिखाई जाती है। इस विधि में जो बालक की मातृभाषा होती है उसे बिना मध्यस्थ बनाएं उसे अन्य भाषा सिखाई जाती है अर्थात मातृभाषा की सहायता नहीं लेकर बल्कि वि‌द्यार्थी को सीधे बार-बार मौखिक एवं लिखित अभ्यास द्वारा सीधे नई भाषा सिखाई जाती है इसमें क्षेत्रीय भाषा का भी प्रयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में वार्तालाप के माध्यम से अधिक से अधिक सीखने पर बल दिया जाता है जिससे वह प्राकृतिक रूप से सीख सकें। 

نمبر چھ: تجزیہ کا طریقہ: اس طریقے میں مسئلے کو چھوٹے چھوٹے حصوں میں تقسیم کرکے ان کا مطالعہ اور جائزہ لے کر حل کیا جاتا ہے۔

6. विश्लेषण विधि (Analysis method): इस विधि में समस्या को छोटे-छोटे भागो में बाँट कर उनका अध्ययन व समीक्षा करते हुए उसे हल किया जाता है।

نمبر سات: ترکیب کا طریقہ:- تجزیہ اور ترکیب کا طریقہ ایک دوسرے کی تکمیل کرتے ہیں،  ترکیب کا کام تجزیہ کے بعد ہی ہوتا ہے۔  اس طریقے میں مسئلے کے چھوٹے چھوٹے حصوں کو ملا کر مسئلہ حل کیا جاتا ہے۔  یہ طریقہ اکثر جیومیٹری میں استعمال ہوتا ہے۔

7. संश्लेषण विधि (Synthesis method) :- विश्लेषण तथा संश्लेषण विधि एक दूसरे के पूरक होती है। विश्लेषण कर लेने के पश्चात ही संश्लेषण का कार्य होता है। इस विधि में किसी समस्या के छोटे-छोटे भागो को जोड़ते हुए समस्या का हल किया जाता है। इस विधि का प्रयोग प्रायः ज्यामिति (Geometry) में किया जाता है।

نمبر آٹھ: نقلی طریقہ:- اس طریقہ میں بچہ تقلید سے سیکھتا ہے، اس لیے اس طریقہ کو نقلی طریقہ کہا جاتا ہے، اس طریقے میں بچہ اپنے استاد کی نقل کرتے ہوئے لکھنا، پڑھنا اور نئی تخلیقات تخلیق کرنا سیکھتا ہے، اس طریقے کے تحت بچے استاد کا تلفظ سن کر پڑھنا سیکھتے ہیں،پہلے استاد بولتا ہے، پھر بچے اس کے پیچھے آتے ہیں۔ اس طریقے کی بنیاد پر درست تلفظ زبان کے استاد کا بہترین معیار سمجھا جاتا ہے۔

8. अनुकरण विधि (Simulation method) :- इस विधि में बालक अनुकरण करके सीखता है इस लिए इस विधि को अनुकरण विधि कहा जाता है। इस विधि में बालक अपने शिक्षक का अनुकरण करके लिखना, पढ़ना व नवीन रचना करना सीखता है। इस विधि के अन्तर्गत बालक शिक्षक के उच्चारण को सुनकर वाचन करना सीखते हैं। पहले शिक्षक बोलता है, फिर बच्चे उसका अनुसरण करते है। इस विधि के आधार पर ही शुद्ध उच्चारण को ही भाषा शिक्षक का सर्वश्रेष्ठ गुण माना जाता हैं।

نمبر نو: لیکچر کا طریقہ:- لیکچر کے طریقہ کار میں کسی بھی حقیقت پر مبنی موضوع کی وضاحت کی جاتی ہے، لیکچر کا طریقہ تدریس کا قدیم ترین طریقہ سمجھا جاتا ہے۔ اس طریقہ کار میں استاد کا کردار نمایاں ہوتا ہے، اس لیے اسے استاد پر مبنی تدریسی طریقہ سمجھا جاتا ہے۔ یہ طریقہ یادداشت کی سطح پر تدریس اور سیکھنے کی سہولت فراہم کرتا ہے۔ سماجی علوم میں لیکچر کا طریقہ سب سے زیادہ استعمال ہوتا ہے۔ لیکچر تدریسی طریقہ کار میں متن اور مضمون کی پیشکش پر زیادہ زور دیا جاتا ہے۔

9. व्याख्यान विधि (Lecture Method) :- व्याख्यान विधि में किसी तथ्य विषय की व्याख्या की जाती है। व्याख्यान विधि को शिक्षण की सबसे प्राचीन विधि माना जाता है। इस विधि में शिक्षक की भूमिका प्रमुख होती है इसलिए इसे शिक्षक केंद्रित शिक्षण विधि मानी जाती है। यह विधि स्मृति स्तर (Memory Level) का शिक्षण अधिगम कराती है। सामाजिक विज्ञान में व्याख्यान विधि का प्रयोग सबसे अधिक होता है। व्याख्यान शिक्षण विधि में पाठ्य वस्तु एवं विषय वस्तु के प्रस्तुतीकरण पर अधिक बल दिया जाता है।

نمبر دس:  فطری طریقہ:- جب کوئی استاد زبان کی مشق کرنے کے لیے ہدف کی زبان میں گہری زبانی گفتگو کا استعمال کر رہا ہو، تو یہ طریقہ قدرتی طریقہ کہلاتا ہے۔

10. प्राक्रतिक विधि (natural method) :- जब एक अध्यापक भाषा का अभ्यास कराने के लिए लक्ष्य भाषा में गहन मौखिक बातचीत का प्रयोग कर रहा है तो इस विधि को प्राकर्तिक विधि के रूप में जाना जाता है।

 اہم:  چنکنگ:- اس میں تصور کو ٹکڑوں میں توڑ کر بچوں کو سمجھایا جاتا ہے۔ جیسے موبائل نمبر کے 10 ہندسوں کو 3 یا 4 ہندسوں کے گروپوں میں تقسیم کرکے یاد رکھنا۔

* Chunking (खंडीकरण) :- इसमें बच्चो को concept टुकड़ों में तोड़ कर समझाया जाता है। जैसे mobile no के 10 अंकों की संख्या को 3 या चार अंकों के समूहों में बाट कर याद करना । 

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